बालकनी बागवानी

बालकनी मसाला-जड़ी बगिया

A garden on every balcony.

बालकनी मसाला-जड़ी बगिया लगभग कवनो दोसरा परियोजना से जल्दी बदला देला। अधिकतर मसाला-जड़ी के खाली 15 से 20 सेमी के गमला चाहीं, तरकारी से बढ़िया अनियमित सींचाई बरदास करेलें, आ रउआ रसोई के दरवाजा से कुछे कदम के दूरी पर रहेलें।

अधिकतर बालकनी खातिर मुख्य पाँच: तुलसी (गरमी आ आड़ चाहीं, दक्खिन भा पच्छिम बालकनी पर सबसे बढ़िया), हरियर प्याज (लगभग ना मरे वाला, हर दिसा में बढ़िया), अजमोद (जमे में देर लागेला बाकिर महीनन ले उपज देला), थाइम (धूप आ सूखा हालात बहुत पसंद, पानी भरल जड़ ना पसंद), आ पुदीना (हमेसा अपना गमला में उगावल जाला, साझा गमला में ई पड़ोसी सबके दबा देला)।

एके नियर पानी के जरूरत वाला मसाला-जड़ी के एक संगे राखीं। भूमध्यसागरीय मसाला-जड़ी: थाइम, ओरेगानो, रोजमेरी, आ सेज, सूखा हालात पसंद करेलें आ एक संगे बढ़िया रहेलें। तुलसी आ धनिया के एक नियर नमी आ अधिका पुष्ट खाद चाहीं। तापमान बढ़ते धनिया के जल्दी फूले से रोके खातिर ओकरा के अधकचरा छाँव में राखीं।

पौधा के घन रखले खातिर नियमित कटाई करीं। तना के एगो पत्ता के गाँठ के ऊपर काटीं, कबो पौधा के पूरा नंगा मत करीं, आ बढ़त सुरू भइला पर हर दू से तीन हफ्ता पर संतुलित तरल खाद दीं। तुलसी आ पुदीना पर फूल के सिरा देखाते छाँट दीं।

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